रंगों की बौछार
दिनांक :- 29=3=2024
दिन :- शुक्रवार
विधा :- कविता
" *रंगों की बौछार* "
आया...आया...रंगों का त्यौहार ,
चहुं ओर छाई , रंगों की बौछार ।
इक दूजे पे रंग ढ़ालके मनाएं हम होली ,
लाल-पीला रंग लगाकर भर देंगे चोली ।
हाथों में आज देखो , रंग बि रंगी रंग है ,
सब के दिल में आज, बड़ा ही उमंग है ।
निकल पड़ी हैं देखो, मस्तानों की टोलीयां ,
लेकर हाथों में , कई रंग और पिचकारीयां ।
देवर भाभी को रंगे,भाई बहन को रंग ढ़ाले ,
त्यौहार मना रहे हैं,बनकर सब भोले भाले ।
मीठ्ठी गुझियां बनाई है , सब ने ये खाई है ,
सब ने हर्षित हो कर , खूब धूम मचाई है ।
होली का त्यौहार है , खुशीयों का त्यौहार ,
गली - गली में है छाई , " रंगों की बौछार " ।
- गोविन्द रीझवाणी " आनंद "_✍️
Gunjan Kamal
30-Mar-2024 10:14 PM
बहुत खूब
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Varsha_Upadhyay
29-Mar-2024 11:30 PM
Nice
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Priyanshu Choudhary
29-Mar-2024 03:26 PM
Super
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